Марои булбули табъи ширини нафас

مرا بلبل طبع شیرین نفس

Каз овоз ӯ ақли мадҳуши гашт

کز آواز او عقل مدهوش گشت

Забонӣ ки вақт наво мекушод

زبانی که وقت نوا میگشاد

Фурӯи баст ва яксар аз он гӯши гашт

فرو بست و یکسر از آن گوش گشت

Ки андари хазони мшиби аўФтод

که اندر خزان مشیب اوفتاد

Баҳори шабобаши фаромӯши гашт

بهار شبابش فراموش گشت

Набинад гули хуррамии зи онсбб

نبیند گل خرمی ز آنسبب

Збонрои фурӯи басту хомӯши гашт

زبانرا فرو بست و خاموش گشت