Шунидам аз сари минбар музаккарӣ мегуфт
شنیدم از سر منبر مذکری میگفت
Ризои ҳақ талабӣ бош бар сари таслим
رضای حق طلبی باش بر سر تسلیم
Бтоъти онкии туфи оташ ҳаво нанишонд
بطاعت آنکه تف آتش هوا ننشاند
Куҷо расад блби оби кавсару таснӣм
کجا رسد بلب آب کوثر و تسنیم
Худои ъзўҷл аз Фроӣзӣ ки ниҳод
خدای عزوجل از فرائضی که نهاد
Ғурем мост ки бояд гузошт ҳақ ғурем
غریم ماست که باید گذاشت حق غریم
Агар чаҳ мавъизаташ айн ҳикматаст ва лек
اگر چه موعظتش عین حکمتست و لیک
Ҳмидҳди карами эзадии марои таълим
همیدهد کرم ایزدی مرا تعلیم
Ки гӯям ар кунам андари адои ҳақи тақсир
که گویم ار کنم اندر ادای حق تقصیر
Буд ба пуштии он кам ғурем ҳаст Карим
بود به پشتی آن کم غریم هست کریم
Кадоми маъсияти ибн ямин тавонад кард
کدام معصیت ابن یمین تواند کرد
Ки беш аз он набӯд раҳмати худои раҳим
که بیش از آن نبود رحمت خدای رحیم