Чаҳ аҷабгар хуии он чеҳраи дили мо бабрад
چه عجب گر خوی آن چهره دل ما ببرد
Кӯҳро сайли чунин гар расад аз ҷои бабрад
کوه را سیل چنین گر رسد از جا ببرد
Ба тамошои чаман рафтан он сарв хуш аст
به تماشای چمن رفتن آن سرو خوش است
Нест ин хуш ки рақибаш ба тамошои бабрад
نیست این خوش که رقیبش به تماشا ببرد
Дили маҷнӯн шуда чун сайд ғизол лайласт
دل مجنون شده چون صید غزال لیلست
Суд набӯд арабаш гарчи зи саҳрои бабрад
سود نبود عربش گرچه ز صحرا ببرد
Дил ки бе ошиқии афсурдаи намояд эй кош
دل که بی عاشقی افسرده نماید ای کاش
Ки сумумяши дарин дашт ба яғмои бабрад
که سمومیش درین دشت به یغما ببرد
Андари он кӯй магӯ номи ту шайдо чун шуд
اندر آن کوی مگو نام تو شیدا چون شد
Пеш ӯ кист ки номи ман шайдои бабрад
پیش او کیست که نام من شیدا ببرد
Ёри меҳмону марои заъф ки оё бе май
یار مهمان و مرا ضعف که آیا بی می
Тарафи майкадаи тасбеҳу мусаллои бабрад
طرف میکده تسبیح و مصلا ببرد
Фонё гашта зи дайраши магари оранди бурун
فانیا گشته ز دیرش مگر آرند برون
Дили онро ки майу соқии тарсои бабрад
دل آن را که می و ساقی ترسا ببرد