Кардамӣ дар хоки кӯии дӯсти мأўо кошкӣ
کردمی در خاک کوی دوست مأوا کاشکی
Сўдмии рухсори худ бар хоки он по кошкӣ
سودمی رخسار خود بر خاک آن پا کاشکی
Омадӣ беруни зи кӯии он сарви боло кошкӣ
آمدی بیرون ز کوی آن سرو بالا کاشکی
Бурқаъи афкандии з рӯй олами оро кошкӣ
برقع افکندی ز روی عالم آرا کاشکی
Дидамӣ дидори он дилдори раъно кошкӣ
دیدمی دیدار آن دلدار رعنا کاشکی
Дида равшан кардамӣ зонрўии зебо кошкӣ
دیده روشن کردمی زانروی زیبا کاشکی
Кӯии онмаҳ то буд ҷинат наме бояд маро
کوی آنمه تا بود جنت نمی باید مرا
То буд ҷинат ба дӯзахи дил фурӯ ноед маро
تا بود جنت به دوزخ دل فرو ناید مرا
Пеши лаълаш кӣ даҳан бо кавсар олоед маро
پیش لعلش کی دهن با کوثر آلاید مرا
То буд он сарви тӯбо хуш намеояд маро
تا بود آن سرو طوبی خوش نمی آید مرا
Хотири андари соя тӯбо наёсоед маро
خاطر اندر سایه طوبی نیاساید مرا
Соя кардӣ бар серуми он сарви боло кошкӣ
سایه کردی بر سرم آن سرو بالا کاشکی
Дай шудам афғони кунон то кӯии он сарви баланд
دی شدم افغان کنان تا کوی آن سرو بلند
То ҷамолаш бингарам ҳар гуҳ бурун ронад саманд
تا جمالش بنگرم هر گه برون راند سمند
Мунтазир май буд то имрӯзи ҷони мустаманд
منتظر می بود تا امروز جان مستمند
Чун бурун омад биравӣ хештан бурқаъ фиканд
چون برون آمد بروی خویشتن برقع فکند
Гарчи имрӯз аз ҷамол ӯ нагаштам баҳраи манд
گرچه امروز از جمال او نگشتم بهره مند
Ваъдаи ин давлат афтодӣ бФрдо кошкӣ
وعده این دولت افتادی بفردا کاشکی
Дар дили зорами ҳаваси дидори он гулчеҳра буд
در دل زارم هوس دیدار آن گلچهره بود
Озим қасраш шудам чун он ҳавас дар дил фузуд
عازم قصرش شدم چون آن هوس در دل فزود
Монеъ омад ҳоҷибами вонгаҳ бсд гуфту шунӯд
مانع آمد حاجبم وانگه بصد گفت و شنود
Ҷониби гулзорам аз баҳри тамошо раҳ намӯд
جانب گلزارم از بهر تماشا ره نمود
Ъошқонрои рухсати гул чидан ва дидан чаҳ суд ?
عاشقانرا رخصت گل چیدن و دیدن چه سود؟
Будӣ он гулчеҳраро изни тамошо кошкӣ
بودی آن گلچهره را اذن تماشا کاشکی
Бо вуҷӯди онкӣ длро нест зон глрўи насиб
با وجود آنکه دلرا نیست زان گلرو نصیب
Неи гули он рӯ ки хорӣ аз сари он кӯи насиб
نی گل آن رو که خاری از سر آن کو نصیب
Не ба ҷони як нукта зон лабҳои ширини гӯи насиб
نی به جان یک نکته زان لبهای شیرین گو نصیب
Не ба чашмами ҷилвае зон оризи некӯи насиб
نی به چشمم جلوه ای زان عارض نیکو نصیب
Кошкӣ гӯям марои гаштии висоли ту насиб
کاشکی گویم مرا گشتی وصال تو نصیب
Бенасибонро насибӣ нест ало кошкӣ
بی نصیبان را نصیبی نیست الا کاشکی
Нест аҳли зуҳдро огоҳӣ аз асрори ишқ
نیست اهل زهد را آگاهی از اسرار عشق
Нақди дайн беқимат афтодаст дар бозори ишқ
نقد دین بی قیمت افتادست در بازار عشق
Аз тариқи оқилӣ безор бошад зори ишқ
از طریق عاقلی بیزار باشد زار عشق
Дайни ҳаме бар бод бояд дод дар атвори ишқ
دین همی بر باد باید داد در اطوار عشق
Бо вуҷӯди ақлу дайн сомон нагирад кори ишқ
با وجود عقل و دین سامان نگیرد کار عشق
Дар ҳуҷум ин шудӣ он ҳар ду яғмо кошкӣ
در هجوم این شدی آن هر دو یغما کاشکی
Онкии шарҳи ҳарфи ҳиҷраши коми ҷонрои сохт мар
آنکه شرح حرف هجرش کام جانرا ساخت مر
Аз збўри ишқи дони ҳам байноташи ҳам з бар
از زبور عشق دان هم بیناتش هم ز بر
Бскаҳи васф ӯ буд вирди забони абду ҳур
بسکه وصف او بود ورد زبان عبد و حر
Гаштааст аз дар назми аҳли тибқи офоқи пар
گشته است از در نظم اهل طبق آفاق پر
Назми ҷомиро ки шуд дар васфи лутф ӯ чу дар
نظم جامی را که شد در وصف لطف او چو در
Ҷо набӯдӣ ғайри гӯши шоҳи воло кошкӣ
جا نبودی غیر گوش شاه والا کاشکی
Хусравӣ каз шамъ райш мебарад хуршеди нур
خسروی کز شمع رایش میبرد خورشید نور
Моҳи нави баҳр ғуломонаш сазад наъли сутур
ماه نو بهر غلامانش سزد نعل ستور
Бандагон ӯ гуҳи размоварӣ хоқони тӯр
بندگان او گه رزم آوری خاقان تور
Човашон ӯ ҳамаи шоҳони гуҳи айшу сарвар
چاوشان او همه شاهان گه عیش و سرور
Шоҳи абўолғозӣ ки мегуяд шаҳи анҷуми зи давр
شاه ابوالغازی که میگوید شه انجم ز دور
Будем дар силки наздикон ӯ ҷо кошкӣ
بودیم در سلک نزدیکان او جا کاشکی
Онкӣ гардун нест дар суръати басони азм ӯ
آنکه گردون نیست در سرعت بسان عزم او
Ақли кули ангушти ҳайрат дар даҳон аз ҳзм ӯ
عقل کل انگشت حیرت در دهان از حزم او
Ларза дар андом баҳр омад зи азми ҷузам ӯ
لرزه در اندام بحر آمد ز عزم جزم او
Ҳар чаҳ ронад боди мағлуб аз бисоти разм ӯ
هر چه راند باد مغلوب از بساط رزم او
Ҳар чаҳ хоҳад боди ҳосил дар ҳарими базм ӯ
هر چه خواهد باد حاصل در حریم بزم او
Вази ҳарими базм ӯ сад солаи раҳ то кошкӣ
وز حریم بزم او صد ساله ره تا کاشکی