Сари зулфи ту на машкаст ва ба машк ноб монад
سر زلف تو نه مشکست و به مشک ناب ماند
Рухи равшани ту эй дӯст ба офтоб монад
رخ روشن تو ای دوست به آفتاب ماند
Ҳамаи шаби зғми нхсбм ки нхсбди ончии ошиқ
همه شب زغم نخسبم که نخسبد آنچه عاشق
Манам он касе ки бедории ман ба хоб монад
منم آن کسی که بیداری من به خواب ماند
ЗФроқ рӯйу мӯии ту здидаҳи хӯни чаконам
زفراق روی و موی تو زدیده خون چکانم
Аҷабаст сахти хӯнӣ ки ба равшан об монад
عجبست سخت خونی که به روشن آب ماند
Сари зулфро мтобони сари зулфро чаҳ тобӣ
سر زلف را متابان سر زلف را چه تابی
Ки дар он ду зулфи нотоФтгӣ ба тоб монад
که در آن دو زلف ناتافتگی به تاب ماند
Ту ба офтоби Монӣу зи ишқ рӯй хубат
تو به آفتاب مانی و ز عشق روی خوبت
Рухи ошиқи ту эй дӯст ба моҳтоб монад
رخ عاشق تو ای دوست به ماهتاب ماند