Ба бодаи сӯфии мо соф аз риё нашавад
به باده صوفی ما صاف از ریا نشود
Ки тори сбҳаҳ ба мизроби хуш наво нашавад
که تار سبحه به مضراب خوش نوا نشود
Ба гул нагӯям аммо шаҳиди номи гулам
به گل نگویم اما شهید نام گلم
Ки аз фусуни ниёзи баҳор во нашавад
که از فسون نیاز بهار وا نشود
Туро чаҳ ҷурм ки ҳукми ғурур ҳасан инаст
ترا چه جرم که حکم غرور حسن اینست
Ки ваъдаҳои ту аз сад яке вафо нашавад
که وعدههای تو از صد یکی وفا نشود
Агар ба хулди рӯми сӯзи дили ҳамон боқии сет
اگر به خلد روم سوز دل همان باقیست
Сумуми бодия дар гулистон сабо нашавад
سموم بادیه در گلستان صبا نشود
Саҳоби абри фасеҳӣ ба ҷурми мо чаҳ кунад
سحاب ابر فصیحی به جرم ما چه کند
Ба қатрае гули айши баҳори воншўд
به قطرهای گل عیش بهار وانشود