Ман ки афсурдаи терм аз нафас мурғ хамӯш
من که افسردهترم از نفس مرغ خموش
Кӣ расад дар чамани ҳасани туами лофи хурӯш
کی رسد در چمن حسن توام لاف خروش
Ҷонгар аз баҳр нисорат нафаристам чаҳ кунам
جان گر از بهر نثارت نفرستم چه کنم
Гули муфлис чаҳ кунад гар нашавад ътрФрўш
گل مفلس چه کند گر نشود عطرفروش
Чаҳ биҳишти сети муҳаббат ки дарав ме гирданд
چه بهشتست محبت که درو میگردند
Гиряи захми ману хандаи гули дӯш ба дӯш
گریه زخم من و خنده گل دوش به دوش
Шавқ бингар ки чу номаш ба забонам ояд
شوق بنگر که چو نامش به زبانم آید
Нигаҳ аз дидаи саросемаи дӯд то дар гӯш
نگه از دیده سراسیمه دود تا در گوش
Теғи нозии магари эҳроми дилами баста ки боз
تیغ نازی مگر احرام دلم بسته که باز
Захмҳо ҳар нафас аз шавқ гушойанд оғӯш
زخمها هر نفس از شوق گشایند آغوش
Неши мижгони ту чун чашм ту шӯхаст мабод
نیش مژگان تو چون چشم تو شوخست مباد
Чашм захмӣ расаду бишиканади андари раги ҳуш
چشم زخمی رسد و بشکند اندر رگ هوش
Ҳиммат дида баландаст фасеҳии тани зан
همت دیده بلندست فصیحی تن زن
Назариро ба тамошои ду олам мафруш
نظری را به تماشای دو عالم مفروش