Даии қосид ёр омаду мижгон тарӣ дошт
دی قاصد یار آمد و مژگانتری داشت
Аз ёри магари баҳри ҳалокам хабарӣ дошт
از یار مگر بهر هلاکم خبری داشت
Умрӣ ба раҳи ёри дилами тухми вафои кишт
عمری به ره یار دلم تخم وفا کشت
Пиндошт ки ин тухм ки мекошт барӣ дошт
پنداشت که این تخم که میکاشت بری داشت
Он буд дили ҷамъ ки аз даст батон буд
آن بود دل جمع که از دست بتان بود
Сад пора ва ҳар пора ӯро дгарӣ дошт
صد پاره و هر پاره او را دگری داشت
Зони пеш ки тозии фарси ноз ба майдон
زآن پیش که تازی فرس ناز به میدان
Бо ҳалқаи фитроки ту ин кушта сиррӣ дошт
با حلقه فتراک تو این کشته سری داشت
Ғами номаи ман байн чаҳ кунӣ қиссаи ёқӯб
غمنامه من بین چه کنی قصه یعقوب
ӯ низ чу ман доғи фироқ писарӣ дошт
او نیز چو من داغ فراق پسری داشت
Поёни шаби меҳнати ман субҳи аҷал буд
پایان شب محنت من صبح اجل بود
Баси турфаи шабӣ буду қиёмат саҳарӣ дошт
بس طرفه شبی بود و قیامت سحری داشت
Шуд ҷузам ба азми сафари ишқи фасеҳӣ
شد جزم به عزم سفر عشق فصیحی
Ҳар чанд ки дар ҳар қадами он раҳ хатарӣ дошт
هر چند که در هر قدم آن ره خطری داشت