Танҳо на зи зулфати дилам ором надорад

ز جور تو دل امتناعی ندارد

Худ кист ки сар дар паии ин дом надорад !

به وصلت سر انتفاعی ندارد

Шамшоди қадони ҷумла ба болой ту нозанад

از آن گوش می‌گیرم از قول مطرب

Сарвӣ чу қадати гулшан айём надорад

که دیوانه تاب سماعی ندارد

Сарриштаи поси дили мо хуби нигаҳи дор

کسی جز زلیخای کاسد محبّت

Як мурғи чунин зулфи ту дар дом надорад

به بازار یوسف متاعی ندارد

Савдои ду чашм ту нарафт аз сару носеҳ

ز هم دورتر افکند دوستان را

Дар шиша дигар равған бодом надорад

فلک به از ین اختراعی ندارد

Гирди лаби ширини ту гирдам ки адое

برید ار ز یاران چه یاریم کردن

Бе чошнии талхӣ дшмном надорад

نمی‌خواست کس را، نزاعی ندارد

Носеҳи сари андеша тадбир маранҷон

مرنج ار وداع تو ناکرده رفتم

Пурвой касе ин дили худ ком надорад

که از خویش رفتن وداعی ندارد

Қадӣ ки набошад равиши ҷилваи нозаш

وصال تو وبخت فیّاضِ بیدل

Монанди қабоеаст ки андом надорад

بلی ممکن است، امتناعی ندارد