Каси ҷони зи захми ханҷари мижгон наме барад

نبرم منّت کس کاش شرابم نبرد

То заҳри чашми ёр ба дармон наме барад

تشنه میرم به لب بحر که آبم نبرد

Шаб нест каз чакидаи мижгонами осмон

جنس ناچیز شود، به که به قیمت نرسد

Аз доманами ситора ба домон наме барад

سوختم خام که کس بوی کبابم نبرد

Ҷузи Хизри хати ёр ки сероб лаъл ӯст

تو به حرف آیی و من می‌روم از خود چه کنم!

Як ташнаи раҳ ба чашмаи ҳайвон наме барад

تنگ ظرفم نتوانم که شرابم نبرد

Кӯи бахти онкии гӯша доман кунад шикор

ذوق دیدار تو در خواب چو طفل شب عید

Дастӣ ки раҳ ба сӯии гиребон наме барад !

هیچ پروای منش نیست که خوابم نبرد

Гули биқрори нолаи парвози бастаи ист

دخل ناز تو هم از خرج نیازم پیداست

Доғам ки каси қафас ба гулистон наме барад

صرفة تست که کس ره به حسابم نبرد

Чун дод дили зи ҷилва девонагӣ диҳад

دیده بر انجم گردون چه نهم می‌دانم

Маҷнӯни ман ки раҳ ба биёбон наме барад !

که ازین ورطه برون موج حبابم نبرد

То субҳи хотири сари зулфаш мушавваш аст

هر دم از بیم درین مرحله از خود بروم

Як шаби маро ки хоби парешон наме барад

دگر اندیشة این دیر خرابم نبرد

Ман чун кунам ки бар сари бозори васли дӯст

نیم آن کس که به بوی توبه جنّت بروم

Кас дайн намесетанду имон наме барад !

حسرت بحر به دنبال سرابم نبرد

Дар ҳар дамаст сад хатарам дар камӣни дайн

نه به من باز گذارد نه به خود کار مرا

Имон зоҳидаст ки шайтон наме барад

به درنگم نفرستد به شتابم نبرد

Донад забони мӯри сулаймони ман вале

ای فلک صرفه‌ای از من نتوان برد به زور

Ин мӯри раҳ ба базми сулаймон наме барад

پنجة شیب تو بازوی شبابم نبرد

Файёзи илтифоти азизон чаҳ шуд ки ҳам

هست این آن غزل روز نظیری فیّاض

Як ҷазба аз Қумам ба сафоҳон наме барад

که به صلحش نروم تا به عتابم نبرد