Ба боғи сабза чу бинад хатат ба сари хезад

که می‌تواند از پیش یار برخیزد؟

Паии тавозуъи қади ту сарв бархезад

نشسته‌ایم که از ما غبار برخیزد

Баҳори хати ту аввали зи пушти лаб сар зад

به اضطرار سپردیم خویش را در عشق

Ки сабза аз тарафи чашмаи бештари хезад

بگو ز مجلس ما اختیار برخیزد

Хаёли он мижа ҳар гуҳи дроидм ба замир

دمی که سرمة خطّش نمی‌کشم در چشم

Ба ҷои нолаи зи дили нӯки нештар хезад

ز دیده جای نگاهم غبار برخیزد

Тарашшӯҳи мижаи обӣ назд бар оташи ман

هلاک تربیت مجلسی شوم که در آن

Мушаххасаст чаҳ серобӣ аз шарари хезад

خزان اگر بنشیند بهار برخیزد

Асар дар он дил сангин намекунад ҳар чанд

نصیب زورق فیّاض باد طوفانی

Ҳазор нолаи сари тезам аз ҷигари хезад

که موج صد خطرش از کنار برخیزد