Аз дуо гуё асари бозам ба матлаб ме расад
به باغ سبزه چو بیند خطت به سر خیزد
Каз лабам то арши имшаби ҷӯш ёрб ме расад
پی تواضع قد تو سرو برخیزد
Шуъла ошомему дӯзах дар таҳи минои мост
بهار خط تو اول ز پشت لب سر زد
Бодаи навашонро ба мо кӣ лоф машраб ме расад
که سبزه از طرف چشمه بیشتر خیزد
Ҳалқае кӣ метавонад кард дар гӯши асар !
خیال آن مژه هر گه درآیدم به ضمیر
намекунад ҷон , то каманди нола бар лаб ме расад
به جای ناله ز دل نوک نیشتر خیزد
Гар ним саршори файзи бодаи ъушрат , чаҳ шуд
ترشّح مژه آبی نزد بر آتش من
Соғари ҳасрати азин базмам лаболаб ме расад
مشخّص است چه سیرابی از شرر خیزد
Чашми мо равшан , ки гирди корвони субҳгоҳ
اثر در آن دل سنگین نمیکند هر چند
Домани афшон аз қафои лашкар шаб ме расад
هزار نالهٔ سر تیزم از جگر خیزد
Қисмати мо бедилони зин гирд хон ҳар субҳу шом
به نقش پای درافتادگی برم غیرت
Неъмати алвони хӯни дил мураттаб ме расад
که چون فتد نتواند ز جای برخیزد
Мазраъи тбхолаҳи муҳтоҷи вуҷӯд абр нест
گه نظاره ز طغیان خون دل فیّاض
Ин чаманро ршҳаҳ аз сарчашма таб ме расад
گمان مبر که نگاهم ز چشم تر خیزد