Пои дил то ба раҳи ишқи ту фарсӯда нашуд
دلم شبی که خیال ترا نشیمن شد
Аз тараддуди нафасӣ дар барам осӯда нашуд
چو آفتاب مرا داغ سینه روشن شد
То гули соғар май лаб ба шукри хандаи кушод
کدام شمع کند خانه روشنم بیتو!
Булбули шишаи зи шевани дамӣ осӯда нашуд
مرا که پرتو خورشید دود روزن شد
То ба савдои ту моро тамаъ хом афтод
به منع گریه به چشم تر آستین چه نهم
Чаҳ зиён буд ки бар бӯда ва нобӯда нашуд !
کنون که راز دلم رو شناس دامن شد
Кас надидем ки дар дом фиребӣ нафитод
ز بس که سنگ ملامت زدند و تاب آورد
Домани ҳиммати мо буд ки олӯда нашуд
دلِ چو شیشة من رفته رفته آهن شد
Ин чаҳ ҳоласт ки аз ҳоли накӯёни файёз
چه رشحه از مژه دادی به کشت غم فیّاض؟
Ҳеҷ чизе ба ҷуз аз ҳасратам афзӯда нашуд !
که دانه خوشه برآورد و خوشه خرمن شد