Ки гуфт ғунчаи хандон ба он даҳон монад !

دل از جفای محرم و بیگانه پر نشد

Чаҳ тӯҳматаст ки гӯйанд ин ба он монад !

صد دل تهی شد و دل دیوانه پر نشد

Дили марои ҳама дар чини зулф ӯ дидан

چون شیشه سر به سجده نبردم که از غمش

Чароғ дар шаби торик кӣ ниҳон монад !

سجّاده‌ام ز اشک چو پیمانه پر نشد

Марои ғариб ватан карду рӯ ба боғи ниҳод

عمریست تا فسانة غم گوش می‌کنم

Ки булбулӣ нагузорад дар ошён монад

گوش دلم هنوز ز افسانه پر نشد

Шабӣ ки васфи рух ӯ ба об ва тоб кунам

داغ فراخ حوصلگی‌های مشربم

Чу шамъ то саҳарами шуъла бар забон монад

صد خانقه تهی شد و خمخانه پر نشد

Чу васфи он лаби хандон рақам кунам файёз

ناید به تنگ سینة فیّاض از غمت

Қалами зи ҳайрати ангушт бар даҳон монад

از گنج هیچگه دل ویرانه پر نشد