Ононкаҳи пай ба роҳи таваккул фишурда анд
کج ابروان که چهره به می تاب دادهاند
Софи ризои зи дарди таҳаммул фишурда анд
از رشک، خم به قامت محراب دادهاند
Ғофил машав зи соғари саршори илтифот
کس جان ز زخم خنجر مژگان نمیبرد
Кин ҷуръаро зи теғи тағофул фишурда анд
این تیغ را به زهرِ نگه آب دادهاند
Савдои мғзкоўи димоғи дили маро
می میچکد ز نغمة مطرب، چه آفتند
Аз печу тоби турраи кокул фишурда анд
این ساقیان که باده به مضراب دادهاند!
Нозук тараст шикваам аз буии гул , магар
ما را که در غم تو کتانپوش طاقتیم
Ин ноларо зи нолаи булбул фишурдаанд ?
گشت تبسّم گل مهتاب دادهاند
То додаанд табъи марои обу ранги фикр
دل را ز خار خار تمنّای وصل خویش
Хӯн аз раги ҳазор таъаммул фишурда анд
خوبان فریب بستر سنجاب دادهاند
Сўдоӣёни фикр ба ташбеҳи зулфи ёр
کنج لب پیاله به بوسی نمیخرند
Хуноби ҳасрат аз дили сунбул фишурда анд
آنان که خط به خون می ناب دادهاند
То чеҳрааш ба об назокат сиришта шуд
آنان که پی به راه توکّل فشردهاند
Аз лолаи рангу нозукӣ аз гул фишурда анд
از دل برون کرشمة اسباب دادهاند
Дар аҳди зулфаш аз раги андешаи аҳли фикр
طوفان فتنه دامنشان تر نمیکند
Савдои имтиноъи тасалсул фишурда анд
دریا دلان که رخت به سیلاب دادهاند
Дилдодагони ишқи зи шарёни орзӯ
جرمش چه زین، که بر مژه یک دم قرار نیست
Хӯни фасоди арзи таҷаммул фишурда анд
اشک مرا که جلوة سیماب دادهاند
Мардони ишқ дар гузари сайли ҳодисот
ما را ز عکس طّرة رخسار گلرخان
Пои саботи сахттар аз пул фишурда анд
شب دادهاند و گوهر شب تاب دادهاند
Файёзи обрӯии ду олами муҷаррадон
فیّاض از تغافل چشم بتان مرنج
Аз гӯшаи радои таваккул фишурда анд
مستند و دل به ذوق شکر خواب دادهاند