Имшаб ки дасти нола зорам бисоз буд
امشب که در چمن ز قدومش نوید بود
Дар базми дил , мадор ба сӯзу гудоз буд
خلوتسرای غنچه گلستان عید بود
Чашм сифед гашта гирифтам ба лухти дил
دیدیم در چمن عجب آیین اتّحاد
Ин буд бар рухам дар субҳӣ ки боз буд
گل داشت ز خم کاری و بلبل شهید بود
Як дам ки тарки чашми ту ғофили зи мо гашт
یک عمر در میانة ما و نگاه دوست
Як умр дар вилояти мо трктоз буд
بیزحمت مجادله گفت و شنید بود
Ҳар ҷо ки аҳли дили нафас гарм ме заданд
خواندیم نامة عمل هر کسی به حشر
Оҳам ба ёди нахли қадати сарфароз буд
چون روی دوست نامة عاشق سفید بود
То аз гули ту буи ҳақиқат шунида ам
بردیم سر فرو به گریبان شام هجر
Корами мудоми тарбияти ин муҷоз буд
شکر خدا که روز قیامت پدید بود
Гаштем пайрави бахт ҷавонӣ нашуд насиб
ما را سبب ز نَیل مسبّب حجاب شد
Ин умр бе насибии мо хуши дароз буд
چیزی که بست بر رخ ما در، کلید بود
Файёзи нозҳо ки кашад аз ниёзи мо ?
فیّاض چون نظر به سراپای دل فکند
Нозӣ ки аз ниёзи ҷаҳон бениёз буд
هر جا که دید جلوة «میرزا سعید» بود