Шабам дар кулбаи дили моҳтоб аз ёди моҳӣ буд

خوش آنکه بلبل ما نغمه‌سنج باغ تو بود

Таманнои ду чашмами тўтёии хоки роҳӣ буд

کسی که بر سر ما جای داشت داغ تو بود

Набӯд он қӯтам аз нотавониҳои дил , варна

نشان کوچة تاریک طرّة تو نیافت

Харобии ду олам аз дилам дар банди оҳӣ буд

نسیم گل که شب و روز در سراغ تو بود

Хушо аҳдӣ ки бо ман ҳар ҷафои кон тундху ме кард

ندید کس دم آبی که گرد غصّه نداشت

Ҷафои дигар аз баҳри талофии узрхоҳӣ буд

به غیر بادة عشرت که در ایاغ تو بود

Сияҳ буд арча рӯзами умрҳо аз ҳиҷри рухсорӣ

کسی به بزم جمال تو روی گرم ندید

Вале чашмами сифед аз ҳасрати зулфи сиёҳӣ буд

جز افتاب که پروانة چراغ تو بود

Харобӣ ёфт роҳӣ дар дилам чун малик бе соҳиб

ز بی‌دماغی فیّاض غم نبود امشب

Хушо аҳдӣ ки дар малики дилами ғами подшоҳӣ буд

که بی‌دماغی او باعث دماغ تو بود