Чунонам базми ъушрат белабаш дилгир ме ояд

به یاد آن قامتم از دیدن شمشاد می‌آید

Ки мавҷи бода дар чашмами дам шамшер ме ояд

به هر جا روی خوش بینم رخ او یاد می‌آید

Надонам бар забони ҳарф ки дорад калаки тақрирам

تو برگ گل به این نازک‌دلی‌ها، چون روا داری!

Вале донам ки буии хӯни азин тақрир ме ояд

که آید از دلت کاری که از فولاد می‌آید

Ба ҷурм аз тоъатами умедворӣ бештар бошад

نباشد حسرت شیرین لبان را چاره جز مردن

Ки аз саъй ончӣ ноед аз ту эй тақсир ме ояд

به گوشم این صدا از تیشة فرهاد می‌آید

Ба ин талхӣ ба умеди ту умр ҷовдон хоҳам

کدامین غنچه را امشب دگر بند قبا بازست

Ки мегуяд ки ҳаргизи ошиқ аз ҷон сайр меояд !

که خوش بوی گل از تحریک موج باد می‌آید

Заранги нолаи осори сироят метавон донист

از آن زخمی که روزی بر سر از بیداد شیرین خورد

Ту зўдо эй нафас бар лаб ки қосид дайр ме ояд

هنوز از رخنه‌های بیستون فریاد می‌آید

Чаҳ шуд имрӯз агар ғайр аз гиребон нест дар дастам

چه سان خواهد کسی داد دل خود از سر زلفی!

Ки фардои даст ҷайб омӯз домангир ме ояд

که از هر عقده بوی خون صد بیداد می‌آید

Чу аҳволи дили девона дар таҳрир май орм

چه بهبودی توان فیّاض دیدن از چنین عمری

Срир хомаам чун нола занҷир ме ояд

که هر روزی که آید روز پیشین یاد می‌آید