Лабии пуршукӯҳ аз ёрон бемеҳр ва вафо дорам

به آن بیگانه امشب یک دو حرف آشنا گفتم

Дилии сад пора аз захми забон ошно дорам

غرض را بی‌غرض کردم سخن بی‌مدّعا گفتم

Ба ҳол чун манӣ кофар ба кофари раҳм май орад

نگاهش را به طرز همزبانی آشنا دیدم

Чаҳ доред эй мусулмонон ба ман , ман ҳам худо дорам

گهی منع از جفا کردم گهی حرف وفا گفتم

Гарав бо чора май бозам ба дарди хеш май созам

رخش نازک دلش نازک حیا از هر دو نازکتر

Азин бе ғами табибон то ба кӣ чашм даво дорам !

سخن پیچیده در صد پرده از رنگ حیا گفتم

Кашида доман аз дастам , парида тир аз шастам

ز نام بوسه بیم رنجه گشتن بود آن پا را

Ба чандини ноумедиҳо ҳануз умедҳо дорам

ولی پیغام اشک آهسته با رنگ حنا گفتم

Ба гоми умри кӯтаҳ чун тавон тай кард ҳайронам

نگاهش کرد اقراری که صد جان پیشکش بایست

Раҳи давру дарозиро ки ман дар зер по дорам !

خجل گشتم که نادانسته حرف خونبها گفتم

Ғами соҳили дарин дарё чу мавҷам музтариб дорад

نمی‌دانم چه‌ها گفتم ولیکن این قدر دانم

Дили ҷамъии ҳамин аз изтироб нохудо дорам

که با من هر چه آن ابروی جادو گفت واگفتم

Ки арзи ҳоли ман пеши туе парво тавонад кард ?

لبت را غنچة فردوس گفتی، حرف بیجا بود

На ашки дарди дили пардоз , на оҳ расо дорам

تبسّم را بهشت جاودان گفتم بجا گفتم

Ба иқболи шаҳодат чун умеди ман ниФзоид !

به من از گوشة ابرو چه‌ها کردی چه‌ها گفتی

Ки шамшери ту бар сари сояи бол ҳумо дорам

من از نظّاره حسرت چه‌ها کردم چه‌ها گفتم

Ба дидорӣ ки май байнами тасаллӣ чун кунам дилро !

به او فیّاض گفتم هر چه دل می‌خواست در مستی

Ки дили завқи тамошояти ҷудо ва ман ҷудо дорам

تو اکنون عذرخواهی کن که من اینک دعا گفتم