Ҳошо ки ғайри ишқи ҳадис дигар кунем

هر دم ز گرمخویی خود برفروزیَم

Як ҳарф хондаем ки як умр бар кунем

پُر گرم هم مباش که ترسم بسوزیَم

Асбоб аз барои мусаббиб буд ба кор

باشد دهان تنگ توام روزی از ازل

Мо аз паии кулоҳ чаро тарк сар кунем !

زانست کز ازل به جهان تنگ روزیم

Бар мо ҷаҳони з хотир мӯраст танг тар

زان شب که دل به زلف سیاه تو بند شد

Ҷой дигар куҷост ки фикр сафар кунем

روشن نمود بر همه کس تیره‌روزیم

Зангаст занг , бӯсаи ҳураш бар оина

خوس آنکه این لباس عناصر بیفکنم

Дастӣ ки бо хаёли ту шаб дар камар кунем

تا چند بر بدن ز غذا پینه دوزیم

Мутриби ту , дод нолаи ман аз гиря май даҳум

فیّاض ما به عیش ابد دل نهاده‌ایم

Чун абру барқ агар мадад икдгр кунем

دل خوش نمی‌شود ز نشاط دو روزیم