Имшаби зи ғамати рӯҳу равонам май сӯхт
امشب ز غمت روح و روانم میسوخت
Вази тоби таби ҷисми ту ҷонам май сӯхт
وز تاب تب جسم تو جانم میسوخت
Зон таб ки шаби дӯш туро дошт ба ранҷ
زان تب که شب دوش ترا داشت به رنج
Мағзӣ ки надошт устихонам май сӯхт
مغزی که نداشت استخوانم میسوخت