Шунида субҳдам аз ҷаври гули афғони булбул ро
شنیده صبحدم از جور گل افغان بلبل را
Бдндони пораи пораи сохтаи шабнами тани гул ро
بدندان پاره پاره ساخته شبنم تن گل را
Чу гирами кокулашро , то кашами сӯии худам , он ма ,
چو گیرم کاکلَش را، تا کِشم سویِ خُودم ، آن مه،
Бқсди даврии ман май кушояди ақди кокул ро
بقصد دوری من می گشاید عقد کاکل را
Саборо ҷӯйбор аз мавҷ дар занҷир ме дорад
صبا را جویبار از موج در زنجیر می دارد
Бҷрми он ки бо зулфат баробар гуфт сунбул ро
بجرم آن که با زلفت برابر گفت سنبل را
Либоси ориятро эътиборӣ нест эй манъам
لباس عاریت را اعتباری نیست ای منعم
зи гулбун кам на бар бодаи даҳ рахти таҷаммул ро
ز گلبن کم نه بر باده ده رخت تجمل را
Чаҳ ҷӯям илтифот аз глрхӣ каз ғояти шухӣ
چه جویم التفات از گلرخی کز غایت شوخی
зи асбоби камол ҳасан медонад тағофул ро
ز اسباب کمال حسن می داند تغافل را
Нае ошиқ , агар фикри наҷот аз қайди ғами дорӣ ,
نه ای عاشق ، اگر فکرِ نجات از قیدِ غم داری،
Чаҳ нисбат бо асири ишқи тадбиру таъаммул ро
چه نسبت با اسیر عشق تدبیر و تأمل را
Фузулӣ бетаваккул роҳ душвораст бар мақсад
فضولی بی توکل راه دشوارست بر مقصد
Мадагар толибӣ аз дасти домони таваккул ро
مده گر طالبی از دست دامان توکل را