Чаҳ аҷабгар ба дил аз теғи ту бедод расад

چه عجب گر به دل از تیغ تو بیداد رسد

Шишаро ҳол чаҳ бошад ки ба фӯлод расад

شیشه را حال چه باشد که به فولاد رسد

Ҳар дам аз ҳиҷри ту бар чархи расонами фарёд

هر دم از هجر تو بر چرخ رسانم فریاد

Ба умедӣ ки магари чарх ба фарёд расад

به امیدی که مگر چرخ به فریاد رسد

Макун аз оҳи ман икроҳ ки шамъи рухи ту

مکن از آه من اکراه که شمع رخ تو

На чароғии сет ки ӯро зарар аз бод расад

نه چراغی‌ست که او را ضرر از باد رسد

Асари бахти баду неки нигар каз ширин

اثر بخت بد و نیک نگر کز شیرین

Коми хусрави баради озор ба Фарҳод расад

کام خسرو برد آزار به فرهاد رسد

То раседаст зи мижгони ту тирӣ бар ман

تا رسیدست ز مژگان تو تیری بر من

Дорам он завқ ки аз сайд ба сайёд расад

دارم آن ذوق که از صید به صیاد رسد

зи ту эй шамъи мунаввар , на чунон шуд Бағдод ?

ز تو ای شمعِ منّور ، نه چنان شد بغداد؟

Ки кунад ёди ватан ҳар ки ба Бағдод расад

که کند یاد وطن هر که به بغداد رسد

Ғами ғайри ту бурун кард фузулӣ аз дил

غم غیر تو برون کرد فضولی از دل

Ки ғамӣ гар расад аз ту ба дил шод расад

که غمی گر رسد از تو به دل شاد رسد