Дилам аз ишқи ту расвоӣ ҷаҳонаст имрӯз

دلم از عشق تو رسوای جهانست امروز

Ғами пинҳони дилам бар ту аёнаст имрӯз

غم پنهان دلم بر تو عیانست امروز

Рӯзгори ман агар гашт сияҳ нест аҷаб

روزگار من اگر گشت سیه نیست عجب

Офтоби рахт аз дида ниҳонаст имрӯз

آفتاب رخت از دیده نهانست امروز

Муддатии хӯн дилам дошт иқомат дар чашм

مدتی خون دلم داشت اقامت در چشم

Паии он сарв сафар карда равонаст имрӯз

پی آن سرو سفر کرده روانست امروز

Дида будам хами гесуии ту имшаб дар хоб

دیده بودم خم گیسوی تو امشب در خواب

Ин ки дорам дили ошуфтаи азонсти имрӯз

این که دارم دل آشفته ازانست امروز

Дӯши дили гӯшаи чашмии зи ту дар ёфта буд

دوش دل گوشه چشمی ز تو در یافته بود

Баҳмони гӯша чашмӣ нигаронаст имрӯз

بهمان گوشه چشمی نگرانست امروز

з майу мғбчаҳ ёрб чаҳ тараб ёфта аст

ز می و مغبچه یارب چه طرب یافته است

Ки дилами мӯътакиф дайр Муғонаст имрӯз

که دلم معتکف دیر مغانست امروز

Дӯш карданд суккони манъи фузулии з дарат

دوش کردند سکان منع فضولی ز درت

Сабаб инаст ки бо оҳ ва фиғонаст имрӯз

سبب اینست که با آه و فغانست امروز