Бе хати сабзати шабӣ ҳар ҷо ки манзили доштам
بی خط سبزت شبی هر جا که منزل داشتم
То саҳар чун сабзаи по аз рашк дар гули доштам
تا سحر چون سبزه پا از رشک در گل داشتم
Дӯши шамъӣ буд ҳмрозм ки аз равшани дилӣ
دوش شمعی بود همرازم که از روشن دلی
Буд ӯро бар забони ман ҳар чаҳ дар дили доштам
بود او را بر زبان من هر چه در دل داشتم
Буд асбоби камоли рифъатам чун маи тамом
بود اسباب کمال رفعتم چون مه تمام
Чун набошад офтобӣ дар муқобили доштам
چون نباشد آفتابی در مقابل داشتم
Буд сад Фарҳодро бар сӯрати ҳолами ҳасад
بود صد فرهاد را بر صورت حالم حسد
Дар назар то нақши он ширини шамоили доштам
در نظر تا نقش آن شیرین شمایل داشتم
Бар ман девонаи ташвиши хирад ҳукмӣ надошт
بر من دیوانه تشویش خرد حکمی نداشت
Сӯрӣ аз савдои ҳисорӣ аз слосли доштам
سوری از سودا حصاری از سلاسل داشتم
Офарин эй заврақи соғари рҳондӣ аз ғамам
آفرین ای زورق ساغر رهاندی از غمم
Ман дарин дарёи куҷои умеди соҳили доштам
من درین دریا کجا امید ساحل داشتم
Гар тиҳии дастами зи дайну дили фузулӣ давр нест
گر تهی دستم ز دین و دل فضولی دور نیست
Ишқи брбўд аз кафи ман ончии ҳосили доштам
عشق بربود از کف من آنچه حاصل داشتم