Гар чашми брхсори ту сад бори кушодам
گر چشم برخسار تو صد بار گشادم
Ҳар бори ду сад сайли брхсори кушодам
هر بار دو صد سیل برخسار گشادم
Фарёди кунони рози дилами пеш ту бикшод
فریاد کنان راز دلم پیش تو بگشاد
Ҳар сайл ки аз дидаи хўнбори кушодам
هر سیل که از دیده خونبار گشادم
Оҳ аз ту ки ногуфтаи боғёри кушодӣ
آه از تو که ناگفته باغیار گشادی
Ҳар роз ки пеши ту ман зори кушодам
هر راز که پیش تو من زار گشادم
То чашми кушодам бтў дидам зи ту озор
تا چشم گشادم بتو دیدم ز تو آزار
Фарёд ки бар худ дар озори кушодам
فریاد که بر خود در آزار گشادم
Бахтам бингар дар раҳ ӯ каз паии роҳат
بختم بنگر در ره او کز پی راحت
Дар раҳгузари сайли фанои бори кушодам
در رهگذر سیل فنا بار گشادم
Гар сина харошидаму хстм аҷабӣ нест
گر سینه خراشیدم و خستم عجبی نیست
Роҳии бадал аз баҳри ғами ёри кушодам
راهی بدل از بهر غم یار گشادم
Корам гиреҳӣ дошт аз он зулфи фузулӣ
کارم گرهی داشت از آن زلف فضولی
Он зулф гирифтам гиреҳ аз кори кушодам
آن زلف گرفتم گره از کار گشادم