зи заъфи тоби тараддуд дигар намонад маро

ز ضعف تاب تردد دگر نماند مرا

Хушам ки заъфи з саргаштагӣ раҳанд маро

خوشم که ضعف ز سرگشتگی رهاند مرا

Фиғон ки орзӯии васли он ду чашми сиёҳ

فغان که آرزوی وصل آن دو چشم سیاه

Чу майли серумаи бхоки сияҳи нишонди маро

چو میل سرمه بخاک سیه نشاند مرا

Танами зи оташ дил мегудохтгар шаби ғам

تنم ز آتش دل می گداخت گر شب غم

Сршги об бар оташ намефишонд маро

سرشگ آب بر آتش نمی فشاند مرا

Ҷаҳонӣ аз паии назора бар серум шудаи ҷамъ

جهانی از پی نظاره بر سرم شده جمع

Нигаҳ кунед ки савдои куҷои расонади маро

نگه کنید که سودا کجا رساند مرا

Дарин умед ки сайдам кунад саг дар ӯ

درین امید که صیدم کند سگ در او

Ҳавас чун оҳӯии ваҳшӣ басӣ дуанд маро

هوس چون آهوی وحشی بسی دواند مرا

Миёни мардумами ин обрӯ басаст ки дӯш

میان مردمم این آبرو بس است که دوش

Паривашии саги даргоҳ хеш хонд маро

پریوشی سگ درگاه خویش خواند مرا

Ман гадо бкаҳ гӯям фузулии ин ғами дил

من گدا بکه گویم فضولی این غم دل

Ки ҳамчуи саги з дар ӯ рақиб ронад маро

که همچو سگ ز در او رقیب راند مرا