Миннат аз дили бсди ҷон дӯст дорам
منت از دل بصد جان دوست دارم
Миннат аз ҷони бсди дили бурдборам
منت از جان بصد دل بردبارم
Маро дар ҳар ду олами ҷузи ту кас нест
مرا در هر دو عالم جز تو کس نیست
Туе дар ҳар ду олами ёри ғорам
تویی در هر دو عالم یار غارم
Чу ман аз манзили аввали гузаштам
چو من از منزل اول گذشتم
Дувуми манзили миёни васли ёрам
دوم منزل میان وصل یارم
Аз он ҷомӣ ки рӯз васл хӯрдам
از آن جامی که روز وصل خوردم
Чу рӯз ҳиҷр шуд андари хуморам
چو روز هجر شد اندر خمارم
Ниқоб аз офтоби рӯи барандоз
نقاب از آفتاب رو برانداز
Ки пеши офтобати зарраи ворам
که پیش آفتابت ذره وارم
Висолати орзӯи венаи ҳад ман нест
وصالت آرزو وین حد من نیست
зи густохии дили баси шармсорам
ز گستاخی دل بس شرمسارم
Бнори оташи ҳиҷрони мадорам
بنار آتش هجران مدارم
Ки ман бунёди ишқатро мадорам
که من بنیاد عشقت را مدارم
Фидояти ҷон ва дилҳо , рӯй бинмо
فدایت جان و دلها، روی بنما
Ки дар мизони ҳиҷрон бе қарорам
که در میزان هجران بی قرارم
Ба васлам тарбият фармо , ки доим
به وصلم تربیت فرما، که دایم
Миёни дарди ҳиҷрони сӯгворам
میان درد هجران سوگوارم
Бики зарбати маро аз хеши бастад
بیک ضربت مرا از خویش بستد
Ман аз теғи ту чун миннат надорам ?
من از تیغ تو چون منت ندارم؟
Ниёзи қосимӣ аз ҳад гузаштаст
نیاز قاسمی از حد گذشتست
з ҳад бигузашт чашми интизорам
ز حد بگذشت چشم انتظارم