Нигор ман зи шабистон ба дар наме ояд

نگار من ز شبستان به در نمی‌آید

Замони гули магари охир ба сар наме ояд

زمان گل مگر آخر به سر نمی‌آید

Баҳор мегузарад соқио таъаллул чист

بهار می‌گذرد ساقیا تعلل چیست

Магари хазони ду се рӯз дигар наме ояд

مگر خزان دو سه روز دگر نمی‌آید

Чаҳ шуд ки лоф климӣ намезанад булбул

چه شد که لاف کلیمی نمی‌زند بلبل

зи шохи гули магари оташ ба дар наме ояд

ز شاخ گل مگر آتش به در نمی‌آید

Гузашти умри азизӣ ки буд давлати васл

گذشت عمر عزیزی که بود دولت وصل

Вале замони ҷудоӣ ба сар наме ояд

ولی زمان جدایی به سر نمی‌آید

Ҳамеша буд ҳам овози ман чаҳ шуд имшаб

همیشه بود هم‌آواز من چه شد امشب

Ба гӯши нолаи мурғ саҳар наме ояд

به گوش نالهٔ مرغ سحر نمی‌آید

Кашами зи савмиъаи дигар ба сӯии майкадаи рахт

کشم ز صومعه دیگر به سوی میکده رخت

Ки буии хайри азин бом ва дар наме ояд

که بوی خیر ازین بام و در نمی‌آید

Касе зи манзили ҷонони хабар ба мо нарасонад

کسی ز منزل جانان خبر به ما نرساند

Ки ҳар ки меравад аз вай хабар наме ояд

که هر که می‌رود از وی خبر نمی‌آید

Агарчӣ нахл муродаст сарви қомати дӯст

اگرچه نخل مرادست سرو قامت دوست

Дареғу дард ки ҳаргиз ба бар наме ояд

دریغ و درد که هرگز به بر نمی‌آید

Ғамин мабош ғборо ки айб бе ҳунарон

غمین مباش غبارا که عیب بی‌هنران

Ба чашми мардуми соҳиб назар наме ояд

به چشم مردم صاحب نظر نمی‌آید