Фиканда захми диламро ба ҳолати беҳбуд

فکنده زخم دلم را به حالت بهبود

Касе мабод гирифтори чашми захми ҳасуд

کسی مباد گرفتار چشم‌زخم حسود

Фузӯнии ғам аз осӯдагии сет бар дили ман

فزونی غم از آسودگی‌ست بر دل من

намефузуд ғамамгар дилам наме осуд

نمی‌فزود غمم گر دلم نمی‌آسود

Чароғи тираи мо ҳам ба кор ме ояд

چراغ تیره ما هم به کار می‌آید

Ба чашми гумшудагони серума май намояди дӯд

به چشم گمشدگان سرمه می‌نماید دود

Аз он нагашта сари ҳамтем чу гардуни хам

از آن نگشته سر همتم چو گردون خم

Ки хуш намой набошад зи хам чу шишаи суҷуд

که خوش‌نمای نباشد ز خُم چو شیشه سجود

Мубини заъифии калакам ки ин сиёҳи забон

مبین ضعیفی کلکم که این سیاه‌زبان

Чу шамъ ҳарчӣ зи тани кост бар забони афзуд

چو شمع هرچه ز تن کاست بر زبان افزود

зи чашми мурғи чамани рафтаи хӯни дили чандон

ز چشم مرغ چمن رفته خون دل چندان

Ки ошён нашносад зи чашм хӯн олуд

که آشیان نشناسد ز چشم خون‌آلود

Саводи шеъри марои хома чун барад ба баёз

سواد شعر مرا خامه چون برد به بیاض

з рашк оварад оби сиёҳи чашми ҳасуд

ز رشک آورد آب سیاه چشم حسود