Ба ғайр аз соя дар Кувайт касе муҳаррам наме ёбам
به غیر از سایه در کویت کسی محرم نمییابم
Кунун рӯзам сияҳ шуд ончунон кон ҳам наме ёбам
کنون روزم سیه شد آنچنان کان هم نمییابم
Чу маҷнӯни оҳӯии саҳро аз он рӯ дӯст ме дорам
چو مجنون آهوی صحرا از آن رو دوست میدارم
Ки буии мардумӣ аз мардум олам наме ёбам
که بوی مردمی از مردم عالم نمییابم
Бирав ин мотаму шеван бар арбоб ъушрат кун
برو این ماتم و شیون بر ارباب عشرت کن
Ки ғайр аз лиззату шодии ман аз мотам наме ёбам
که غیر از لذّت و شادی من از ماتم نمییابم
Магари он мояи шодӣ буд ғамгин ки бе мӯҷиб
مگر آن مایه شادی بود غمگین که بیموجب
Дили шӯридаи худро дигар хуррам наме ёбам
دل شوریده خود را دگر خرّم نمییابم
Марои ҳад шикоят нест лекин ӣнқадар гӯям
مرا حدّ شکایت نیست لیکن اینقدر گویم
Ки аз ту ҳолатӣ медидам ва ин дам наме ёбам
که از تو حالتی میدیدم و این دم نمییابم
Надонам ишқи ман гмгштаҳ шуд ё бе худии афзӯн
ندانم عشق من گمگشته شد یا بیخودی افزون
Ки он хушбахтии аввали зи дард ва ғам наме ёбам
که آن خوشبختی اوّل ز درد و غم نمییابم
Манам ошиқи марои дили риш бояд неши неи марҳам
منم عاشق مرا دل ریش باید نیش نی مرهم
Ки завқӣ каз ҷароҳати байнам аз марҳам наме ёбам
که ذوقی کز جراحت بینم از مرهم نمییابم
Магар дар ошиқии мҳиӣ кам аз Фарҳод ва маҷнӯн аст
مگر در عاشقی محیی کم از فرهاد و مجنون است
Агар зишон набошад беш борӣ кам наме ёбам
اگر زیشان نباشد بیش باری کم نمییابم