Ба май кашон субҳдам дод салои пери дайр

به می کشان صبحدم داد صلا پیر دیر

Ки эй сабӯҳии кашони субҳи саодати бихир

که ای صبوحی کشان صبح سعادت بخیر

Бода ваҳдат кашид то ки бахуд пай бурид

باده وحدت کشید تا که بخود پی برید

Чун з , дўӣӣ бигузаред нест дар ин дайри ғайр

چون ز، دوئی بگذرید نیست در این دیر غیر

Сайр дар офоқ кун то ки ба анфуси рисӣ

سیر در آفاق کن تا که به انفس رسی

Нафас нафисӣ биҷӯ комил аз ӯ сози сайр

نفس نفیسی بجو کامل از او ساز سیر

Хилқат симурғ кард ҳиммати волои мо

خلقت سیمرغ کرد همت والای ما

Зодаи Марями бсохти арбшби тираи тайр

زاده مریم بساخت اربشب تیره طیر

Зинда ҷовид бош каз ақаби мӯати тан

زنده جاوید باش کز عقب موت تن

Заҳмати мурдани дубор то накашӣ чун ъзир

زحمت مردن دوبار تا نکشی چون عزیر

Рӯ , ба паноҳ касе то ки ту ҳам каси шӯй

رو، به پناه کسی تا که تو هم کس شوی

Варна ки будӣ балол ё зи куҷои бади брир

ورنه که بودی بلال یا ز کجا بد بریر

эй алии аллоҳ ё бош ту дарвеши кеш

ای علی الله یا باش تو درویش کیش

Чунки з насронӣаст миллату кеши насир

چونکه ز نصرانی است ملت و کیش نصیر

Онкӣ буд ёри мо кӣ шавад ағёри мо

آنکه بود یار ما کی شود اغیار ما

Фии алмисли ағёри мо талҳа буд ё зубайр

فی المثل اغیار ما طلحه بود یا زبیر

Бо ҳама дар сулҳи кули дасти даҳу дасти гир

با همه در صلح کل دست ده و دست گیر

То ки шавад аз ту нави одати ин куҳнаи дайр

تا که شود از تو نو عادت این کهنه دیر

« ҳоҷиб » дарвешро кӣ шавад он каси ҳариф

«حاجب » درویش را کی شود آن کس حریف

Кӯ нашносад ба умри лафзи ҳмор аз ҳмир

کو نشناسد به عمر لفظ حمار از حمیر