Рӯзи ҷашни ҷаму ҳон навбат ҷомаст имрӯз
روز جشن جم و هان نوبت جامست امروز
Ҷоми даҳ ҷом ки ҳар кори бкомсти имрӯз
جام ده جام که هر کار بکامست امروز
Гул чу шоҳасту ғуломони саро , сарв ,у саман
گل چو شاه است و غلامان سرا، سرو، و سمن
Соз , зад сиҳаҳ чу чоўўш саломаст имрӯз
ساز، زد صیحه چو چاووش سلامست امروز
Онкии як умри бадии мӯътакифи андари масҷид
آنکه یک عمر بدی معتکف اندر مسجد
Пайкараш бар дар майхона мақомаст имрӯз
پیکرش بر در میخانه مقامست امروز
Булбул аз шавқи гули имрӯз буд нағмаи саро
بلبل از شوق گل امروز بود نغمه سرا
Кори ушшоқ ҳамоно ба низомаст имрӯз
کار عشاق همانا به نظامست امروز
Фатвои пер Муғонаст ки дар мазҳаби мо
فتوی پیر مغان است که در مذهب ما
намеҳалоласт риё маҳз ҳаромаст имрӯз
می حلال است ریا محض حرامست امروز
Холи мшгини ту дар зулф дилам карда асир
خال مشگین تو در زلف دلم کرده اسیر
Мурғии андари тамаъи дона ба домаст имрӯз
مرغی اندر طمع دانه به دامست امروز
Гуфтам аз рӯзи қиёмат хабарӣ ҳаст ту ро
گفتم از روز قیامت خبری هست تو را
Қад , бар афрохт ки ҳон рӯз қиёмаст имрӯз
قد، بر افراخت که هان روز قیامست امروز
Дар харобот ки сари манзил қлошон аст
در خرابات که سر منزل قلاشان است
Маскани воъиз ва мأўоӣ эмомаст имрӯз
مسکن واعظ و مأوای امامست امروز
Бодаи хур зонка буд шаҳнаи чунон маст ки боз
باده خور زانکه بود شحنه چنان مست که باز
Маст ва ҳушёр надонад ки кадомаст имрӯз
مست و هشیار نداند که کدامست امروز
Муддаиро мучашони бодаи маънӣ « ҳоҷиб »
مدعی را مچشان باده معنی «حاجب »
Балаи пухтаи куҷо дар зар хомаст имрӯз
بله پخته کجا در زر خامست امروز