Муроди ман зи висоли ту барнаме ояд

مراد من ز وصال تو برنمی‌آید

Балои ишқи ту бар ман ба сар наме ояд

بلای عشق تو بر من به سر نمی‌آید

Шаби ҷавонии ман дар умед ту бигузашт

شب جوانی من در امید تو بگذشت

Ҳануз субҳи висоли ту барнаме ояд

هنوز صبح وصال تو برنمی‌آید

Дарахти васли ту дар боғи умри бншондм

درخت وصل تو در باغ عمر بنشاندم

Бирафт умр ва ҳануз он ба бар наме ояд

برفت عمر و هنوز آن به بر نمی‌آید

Дар орзӯии ту бар ман дамӣ наме гузарад

در آرزوی تو بر من دمی نمی‌گذرد

Ки бар дилами зи ту ҷӯрӣ дигар наме ояд

که بر دلم ز تو جوری دگر نمی‌آید

Дилами ббрдӣу ҷон аз кафи ту ҳам набарам

دلم ببردی و جان از کف تو هم نبرم

Ки тири ҳиҷри ту ҷуз бар ҷигар наме ояд

که تیر هجر تو جز بر جگر نمی‌آید

Дилам бирафт ба ҷое ғариб сар биниҳод

دلم برفت به جایی غریب سر بنهاد

Взони заъифу ғарибам хабар наме ояд

وزآن ضعیف و غریبم خبر نمی‌آید

Агарчӣ ҷустани васли ту сурбаи сар хатар аст

اگرچه جستن وصل تو سربه‌سر خطر است

Турои зи куштани ман худ хатар наме ояд

ترا ز کشتن من خود خطر نمی‌آید

Руху лаби ту чунон сабру ҳуши ман брбўд

رخ و لب تو چنان صبر و هوش من بربود

Ки ёдам аз гулу танг шукр наме ояд

که یادم از گل و تنگ شکر نمی‌آید

Хаёл рӯй ту дар чашми ман чунон бинишаст

خیال روی تو در چشم من چنان بنشست

Ки офтобу муҳим дар назар наме ояд

که آفتاب و مهم در نظر نمی‌آید

Бар ин сиришк чу симу рух чу зари раҳми ор

بر این سرشک چو سیم و رخ چو زر رحم آر

Агар чаҳ дар ?назарети сим ва зар наме ояд

اگر چه در نظرت سیم و زر نمی‌آید

зи оҳи ман ба саҳари санги хора нарм шавад

ز آه من به سحر سنگ خاره نرم شود

Чаҳ гӯямат ки ба гӯшт магар наме ояд

چه گویمت که به گوشت مگر نمی‌آید

Ҳазор тири зи шасти дуо раҳо кардам

هزار تیر ز شست دعا رها کردم

Взони ҳазор яке коргар наме ояд

وزآن هزار یکی کارگر نمی‌آید

зи ошиқони ҷаҳони кас чу ибн ҳамгар нест

ز عاشقان جهان کس چو ابن همگر نیست

Валек ҳеҷ ба чашми ту дар наме ояд

ولیک هیچ به چشم تو در نمی‌آید

Бад-ӣни далерӣу чустӣ ки ӯст дар раҳи ишқ

بدین دلیری و چستی که اوست در ره عشق

Бад-ӣни чунин ки туе бо ту бар наме ояд

بدین چنین که تویی با تو بر نمی‌آید

Ба шаби зи нолаи ман олимӣ наме хусбанд

به شب ز ناله من عالمی نمی‌خسبند

Магар ба гӯши ту оҳ саҳар наме ояд

مگر به گوش تو آه سحر نمی‌آید