Чун ин мақомаи бисту чаҳорум таҳрир афтод ; вақту ҳолро аз нсқи аввал тағйир афтод , соқии нўоӣб дар додан омаду арӯси масоиб дар зодан , на дилро раъй тадаббур монад венаи табъро ҷои тафаккур .
چون این مقامه بیست و چهارم تحریر افتاد؛ وقت و حال را از نسق اول تغییر افتاد، ساقی نوائب در دادن آمد و عروس مصائب در زادن، نه دل را رأی تدبر ماند ونه طبع را جای تفکر.
Ғавғои тадбир аз султони тақдир бҳзимт шуд , назми аҳволро қўоФӣ намонад ва дар қадаҳи рӯзгори шароби софӣ на , на хотири қудрати маънӣ сифтан дошт ва на забони қӯти сухани гуфтан .
غوغای تدبیر از سلطان تقدیر بهزیمت شد، نظم احوال را قوافی نماند و در قدح روزگار شراب صافی نه، نه خاطر قدرت معنی سفتن داشت و نه زبان قوت سخن گفتن.
Ани ҳўии кули соҳибу халил
عن هوی کل صاحب و خلیل
Шғлтнии нўоӣбу хтўб
شغلتنی نوائب و خطوب
Чун дар авоили ин тсўиди бустони табиӣ дар тароват буду миваи рабиъӣ бо ҳаловати табъ дар чамани боғу хотир дар маснади фироқ буд .
چون در اوایل این تسوید بستان طبیعی در طراوت بود و میوه ربیعی با حلاوت طبع در چمن باغ و خاطر در مسند فراغ بود.
Акнӯн ҳамаи насимҳо сумуми гашту ҳамаи шаҳдҳо сумум , ҳамаи синаҳо хнқи хонаи шдоӣди гӯногӯну ҳамаи дилҳо мҳти раҳли мкоӣди рӯзи афзӯн .
اکنون همه نسیم ها سموم گشت و همه شهدها سموم، همه سینه ها خنق خانه شدائد گوناگون و همه دلها محط رحل مکائد روز افزون.
Қалам аз таҳрири ин сухани астъФоء май хосту забон аз тақрири ин ҳол истиғфор мекард , ахттоми ин сухани нсқ ифтитоҳ надошту рўоҳи ин таркиби ҷамъияти сабоҳ на .
قلم از تحریر این سخن استعفاء می خواست و زبان از تقریر این حال استغفار می کرد، اختتام این سخن نسق افتتاح نداشت و رواح این ترکیب جمعیت صباح نه.
Аз наққоши қриҳти ҷузи сӯрати Фзиҳт падед набӯду қуфли бастаи хотирро ҷузи хомӯшии калид на , шаби обистан бар фарши ҳамл ниҳодани сари нои халаф зодан дошт .
از نقاش قریحت جز صورت فضیحت پدید نبود و قفل بسته خاطر را جز خاموشی کلید نه، شب آبستن بر فرش حمل نهادن سر نا خلف زادن داشت.
Донистам ки дар сафи мотами дафи арӯсиро наёяд ва ҳар шумор ки азин коргӣрии ҷуз каму кост на , маслиҳати он рӯй намӯд ки азин хами бад-ӣни қадари чошнӣ бас карда ояд ва ин афсонаи ҳам бад-ӣни ҷой ақтсор уфтад ки ихтисор дар сухани номақбӯл , писандида тарасту кӯтоҳӣ дар ҳазёни номаълӯми сутӯдатар .
دانستم که در صف ماتم دف عروسی را نیاید و هر شمار که ازین کارگیری جز کم و کاست نه، مصلحت آن روی نمود که ازین خم بدین قدر چاشنی بس کرده آید و این افسانه هم بدین جای اقتصار افتد که اختصار در سخن نامقبول، پسندیده تر است و کوتاهی در هذیان نامعلوم ستوده تر.
Агар вақте ғрмои ҳаводиси басӯии мсомҳту масолеҳат боз оянду дасти хусумат аз остину домани қабо ва пероҳан бидоранд , онгаҳ басари ин афсонаи нохушу алфози мушавваш боз гирдему оҳани зангори хӯрдаро нарм кунему биринҷи сард шударо гарм .
اگر وقتی غرمای حوادث بسوی مسامحت و مصالحت باز آیند و دست خصومت از آستین و دامن قبا و پیراهن بدارند، آنگه بسر این افسانه ناخوش و الفاظ مشوش باز گردیم و آهن زنگار خورده را نرم کنیم و برنج سرد شده را گرم.
Икрштаҳ шавем муҷтамаъ чун мӯят
یکرشته شویم مجتمع چون مویت
Гар кор бникўӣ шавад чун рӯят
گر کار بنیکوی شود چون رویت
Агар ин ҷароҳат мунфаҷир нагардад воин орзӯ дар сина мутаҳаҷҷир намонад он худ аз кирдори кори рӯзгор мавъӯдаст вози гардиши лайл ва наҳор маъҳуд .
اگر این جراحت منفجر نگردد واین آرزو در سینه متحجر نماند آن خود از کردار کار روزگار موعود است واز گردش لیل و نهار معهود.
Баси сина каз осеби ту эй чархи ҳрўн
بس سینه کز آسیب تو ای چرخ حرون
Дар қабзаи рӯзу шаб асирасту забун
در قبضه روز و شب اسیر است و زبون
Ғараз аз ин ҳамаи тзкор ва такрор онаст то ёрони сӯрати ин аътзор бидонанд всўрти ин мавонеъ бархонанд ва низ дар аснои ин мактуб чанд қитъа маърӯфаст ва аз мисраҳои ӯ мзҳўФаст .
غرض از این همه تذکار و تکرار آنست تا یاران صورت این اعتذار بدانند وسورت این موانع برخوانند و نیز در اثنای این مکتوب چند قطعه معروف است و از مصرعهای او مزحوف است.
Баъиллатии онкии ман дарини мактуб дар тарҷумаи порсӣ дар паии назму насрии тозӣ рафтаам ва дар он мзоиқи бзрўрти мавонеъу ъўоиқи лаҳнӣу зҳФӣ ки бнздики шуъаро муҷаввизаст рафта ;
بعلت آنکه من دراین مکتوب در ترجمه پارسی در پی نظم و نثری تازی رفته ام و در آن مضایق بضرورت موانع و عوایق لحنی و زحفی که بنزدیک شعرا مجوز است رفته؛
Чун тأнису тзкирӣу тақдиму таъхирӣу сарфи лоинсрФӣ ва он чун ҷуста шавад дар ашъори қудамои назир он ёфта ояду алФозли ман ъдти сқтотаҳу аҳрзти млтқтотаҳ .
چون تأنیث و تذکیری و تقدیم و تأخیری و صرف لاینصرفی و آن چون جسته شود در اشعار قدما نظیر آن یافته آید و الفاضل من عدت سقطاته و احرزت ملتقطاته.
Аммо удабои номؤдбу блғои номуҳаззаб ки ҳануз дар такрори зарби зайд ъмро бошанд ин маъниро мункир донанд воин суханро муқарар шиносанд ва дарин майдони гўз пуда шикананду ранҷ беҳуда зананд ва аз болўъаҳи хотири худ қӣ ҳо карда таомҳои хӯрда бароранд вози ҳуҷҷатҳо ки : азъФи ман илал алнҳўиин хонанд бҳкми савдои яди Байзои намоянду сари ани фии алқуръони лҳнои астқомҳои алъараб болснтҳо ндонанд .
اما ادبای نامؤدب و بلغای نامهذب که هنوز در تکرار ضرب زید عمرا باشند این معنی را منکر دانند واین سخن را مقرر شناسند و درین میدان گوز پوده شکنند و رنج بیهوده زنند و از بالوعه خاطر خود قی ها کرده طعامهای خورده برآرند واز حجتها که: اضعف من علل النحویین خوانند بحکم سودا ید بیضا نمایند و سر ان فی القرآن لحنا استقامها العرب بالسنتها ندانند.
« ФأърФи анноси наҳви кули мустамеъ » шарти фозилон ва бхрдон онаст ки ҳамчунон бинӣ дар изои он бар вазну радифи ҳам бар он қолабу маънӣ таркиб кунанд .
«فأعرف الناس نحو کل مستمع » شرط فاضلان و بخردان آنست که همچنان بینی در ازای آن بر وزن و ردیف هم بر آن قالب و معنی ترکیب کنند.
Пас дар тъиб кӯшанд , лиърФи алсҳиҳи ман алсқиму иълми ани фавқи кули зии илми алӣам , эзади таъолии мороу дӯстони моро аз айб ҷустани ёрону таъни қадаҳи ҳамкорони нигоҳи дороаду ҳазёноти ин афсона ҳои нобӯдау саргузаштҳои ношнўдаҳ аз мо дргзроноди баҳақи алмустафои Муҳамаду ?алаи алтоҳрину силами тслимои ксиро .
پس در تعیب کوشند، لیعرف الصحیح من السقیم و یعلم ان فوق کل ذی علم علیم، ایزد تعالی ما را و دوستان ما را از عیب جستن یاران و طعن قدح همکاران نگاه داراد و هذیانات این افسانه های نابوده و سرگذشت های ناشنوده از ما درگذراناد بحق المصطفی محمد و آله الطاهرین و سلم تسلیما کثیرا.
поён
پایان