Мирзои содиқ ки пеши қоматаш
میرزا صادق که پیش قامتش
Сарв бошад чун ниҳоли кӯтаҳӣ
سرو باشد چون نهال کوتهی
Онкӣ аз нўролҳӣ рӯй ӯст
آنکه از نورالهی روی اوست
Огаҳии бахши дил ҳар огаҳӣ
آگهی بخش دل هر آگهی
Кавкаби бахти баланд бе завол
کوکب بخت بلند بیزوال
Пеши пои бгзоштши равшани раҳе
پیش پا بگذاشتش روشن رهی
Басти ақди издивоҷу иттисол
بست عقد ازدواج و اتصال
Бо дурахшони Меҳрӣу тобони маӣ
با درخشان مهری و تابان مهی
Чун ба шодӣу нишоти он ҳар ду ёр
چون به شادی و نشاط آن هر دو یار
Ҳамнишин гаштанд дар хилвати гуҳӣ
همنشین گشتند در خلوتگهی
Ақл бо ҳотифи паии таърихи он
عقل با هاتف پی تاریخ آن
Гуфт Меҳрӣ муҷтамаъ шуд бо маӣ
گفت مهری مجتمع شد با مهی