Ошиқ касе буд ки кашад бори ёри хеш

عاشق کسی بود که کشد بار یار خویش

Шаҳвати парасти монда буд зери бори хеш

شهوت پرست مانده بود زیر بار خویش

Шуд зиндагонӣами ҳама дар кори ишқи ёр

شد زندگانیم همه در کار عشق یار

ӯ фориғ аз вуҷӯдаму машғӯли кори хеш

او فارغ از وجودم و مشغول کار خویش

Чашмам чу ҷӯйбор шуд аз интизор ва нест

چشمم چو جویبار شد از انتظار و نیست

Он навбаҳорро ҳаваси ҷӯйбори хеш

آن نوبهار را هوس جویبار خویش

Аз ошиқони муродаш агар беМуродӣ аст

از عاشقان مرادش اگر بی‌مرادی است

Моро ризои ёр ба аз ихтиёри хеш

ما را رضای یار به از اختیار خویش

Чашмаш ба тири ғамза чу мебификанад шикор

چشمش به تیر غمزه چو می‌بفکند شکار

Беилтифот мегузарад бар шикори хеш

بی‌التفات می‌گذرد بر شکار خویش

Дар банди зулфи ёр буд ҷони ман ҳануз

در بند زلف یار بود جان من هنوز

Рӯзӣ ки зин диёр равад бо диёри хеш

روزی که زین دیار رود با دیار خویش

Шабҳо мхсбу рӯзи мёсоӣ Эй ҳамам

شب‌ها مخسب و روز میاسای ای همام

Як шаби магари рисӣ ба висолнигор хеш

یک شب مگر رسی به وصال نگار خویش

Имрӯзи рӯзгор риёзат кашӣдан аст

امروز روزگار ریاضت کشیدن است

Зойеъ макун чу бе хабарони рӯзгори хеш

ضایع مکن چو بی‌خبران روزگار خویش

Гар ҳастӣ мурод ту бархезад аз миён

گر هستی مراد تو برخیزد از میان

Ёбии муроди хештани андари канори хеш

یابی مراد خویشتن اندر کنار خویش