Сари шохи гули тоирии як саҳар
سر شاخ گل طایری یک سحر
Ҳаме гуфт бо тоирон дигар
همی گفت با طایران دگر
« надоданд боли одамии зода ро
«ندادند بال آدمی زاده را
Замин гир карданд ин содаро »
زمین گیر کردند این ساده را»
Бадв гуфтам эй мурғаки боди санҷ
بدو گفتم ای مرغک باد سنج
Агар ҳарфи ҳақ бо ту гӯям маранҷ
اگر حرف حق با تو گویم مرنج
зи тайёраи мо бол ва пар сохтем
ز طیاره ما بال و پر ساختیم
Сӯии осмон раҳгузар сохтем
سوی آسمان رهگذر ساختیم
Чаҳ тайёраи он мурғи гардуни сипар
چه طیاره آن مرغ گردون سپر
Пар ӯ зи боли малики тез тар
پر او ز بال ملک تیز تر
Ба парвози шоҳин ба неруи уқоб
به پرواز شاهین به نیرو عقاب
Ба чашмаши зи Лоҳур то фориёб
به چشمش ز لاهور تا فاریاب
Бгрдўни хурӯшандау тунди ҷӯш
بگردون خروشنده و تند جوش
Миёни нишеман чу моҳӣ хамӯш
میان نشیمن چو ماهی خموش
Хиради зи обу гули Ҷабраили офарид
خرد ز آب و گل جبرئیل آفرید
Заминро бгрдўни далели офарид
زمین را بگردون دلیل آفرید
Чу он мурғи зирак каломам шайъанд
چو آن مرغ زیرک کلامم شیند
Марои як назар ошноёнаҳ дид
مرا یک نظر آشنایانه دید
Паришро ба минқор хоред ва гуфт
پرش را به منقار خارید و گفت
Ки ман ончӣ гўӣӣ надорам шигифт
که من آنچه گوئی ندارم شگفت
Магар эй нигоҳи ту бар чун ва чанд
مگر ای نگاه تو بر چون و چند
Асири тилисми ту пасту баланд
اسیر طلسم تو پست و بلند
« ту кори заминро накӯи сохтӣ
«تو کار زمین را نکو ساختی
Ки бо осмон низ пардохтӣ »
که با آسمان نیز پرداختی»
саъдӣ
سعدی