Тирӣ каз он ду ғамзаи пурфани буруни ҷаҳд

تیری کز آن دو غمزه‌ی پرفن برون جهد

Танҳо на аз дилам ки зи оҳани буруни ҷаҳд

تنها نه از دلم که ز آهن برون جهد

Ҳар соъатӣ ба мавҷи дигаргун дар аўФтм

هر ساعتی به موج دگرگون در اوفتم

Аз сайл дидаам ки зи домани буруни ҷаҳд

از سیل دیده ام که ز دامن برون جهد

Зини сон ки дар шиканҷаи ҳиҷрон дар афтода ам

زین سان که در شکنجه‌ی هجران در اوفتم

Бимаст ҷони хаста ки аз тани буруни ҷаҳд

بیم است جان خسته که از تن برون جهد

Ҳар субҳу шоми каллаи бибандад бар осмон

هر صبح و شام کلّه ببندد بر آسمان

Ин дӯди оҳи ман ки зи равзани буруни ҷаҳд

این دود آه من که ز روزن برون جهد

Гуфтам ҳадисӣ аз даҳан хештан бигӯӣ

گفتم حدیثی از دهن خویشتن بگوی

Гуфт ин сухан кӣ аз даҳани ман буруни ҷаҳд

گفت این سخن کی از دهن من برون جهد

Субҳасту меҳр дам зада зини саҳни дўднок

صبح است و مهر دم زده زین صحن دودناک

Монанди шуъла ки з [ равзан ] гулхани буруни ҷаҳд

مانند شعله‌ای که ز گلخن برون جهد

Ҷони пурвирди насим ки аз зулф ӯ вазад

جان پرورد نسیم که از زلف او وزد

Чун боди субҳдам ки зи гулшани буруни ҷаҳд

چون باد صبحدم که ز گلشن برون جهد

Соқӣ бигӯ ба булбул то баркашад наво

ساقی بگو به بلبل تا برکشد نوا

Бошад ки зоғи ғами зи нишемани буруни ҷаҳд

باشد که زاغ غم ز نشیمن برون جهد

Зон сони гудохтаи сети зи ҳиҷрон ӯ ҷалол

زان سان گداخته ست ز هجران او جلال

Каз лоғарии зи чашмаи сӯзани буруни ҷаҳд

کز لاغری ز چشمه‌ی سوزن برون جهد