эй зулфу рухи ту чун шабу рӯз
ای زلف و رخ تو چون شب و روز
Ин дилбандаст ва он дили афрӯз
این دلبند است و آن دل افروز
Ин дилҷӯйаст ва он длором
این دلجوی است و آن دلارام
Ин дил хоҳаст ва он дил андӯз
این دل خواه است و آن دل اندوز
Зулфи сияҳи ту чун шаби қадар
زلف سیه تو چون شب قدر
Рухсори маи ту рӯзи наврӯз
رخسار مه تو روز نوروز
Булбул ки навои ҳамеи навозад
بلبل که نوا همی نوازد
Гӯи нолаи ошиқони биомуз
گو ناله عاشقان بیاموز
Гар маҷлиси мо на лоиқи тест
گر مجلس ما نه لایق تست
Шамъии зи ҷамол худ барафрӯз
شمعی ز جمال خود برافروز
Ин дард бадал шавад ба дармон
این درد بدل شود به درمان
Кандар пай ҳар шабӣ буд рӯз
کاندر پی هر شبی بود روز
Бо шамъ чу ҳол худ бигуфтам
با شمع چو حال خود بگفتم
Бар ман бигирист аз сари сӯз
بر من بگریست از سر سوز
Ин турфаи нигар ки номи бахтам
این طرفه نگر که نام بختم
Зеро сияҳаст ки ҳаст пирӯз
زیرا سیه است که هست پیروز
То чанд ҷалол ! фикри фардо
تا چند جلال! فکر فردا
Хуш бош ба нақди ҳолеи имрӯз
خوش باش به نقد حالی امروز