Ман бандаи ҳақир ва ту султони муҳташам
من بنده حقیر و تو سلطان محتشم
Гар дар ғами ту зори бимирами туро чаҳ ғам
گر در غم تو زار بمیرم تو را چه غم
Ранҷур гаштаам зи таманнои мақдамат
رنجور گشته ام ز تمنای مقدمت
Баҳри худо ба пурсиши ман ранҷа кун қадам
بهر خدا به پرسش من رنجه کن قدم
Бар ҷонам аз ту ҳар чаҳ расад ҷой миннат аст
بر جانم از تو هر چه رسد جای منت است
Гар новак ҷафостгар ханҷари ситам
گر ناوک جفاست گر خنجر ستم
Саргаштагони бодияи паймои ишқ ро
سرگشتگان بادیه پیمای عشق را
Ҳиҷри ту раҳ намӯд ба сари манзили адам
هجر تو ره نمود به سر منزل عدم
Шуд синаам шикофи шикоф аз хаданги оҳ
شد سینه ام شکاف شکاف از خدنگ آه
Ваз ҳар шикофи оташ дил мезанад илм
وز هر شکاف آتش دل می زند علم
Рӯзӣ ки менавишт қазои номаи аҷал
روزی که می نوشت قضا نامه اجل
Қатли маро ба теғи ҷафоӣ ту зад рақам
قتل مرا به تیغ جفای تو زد رقم
Умрии сети ҷуръаи хори суфол сегон туаст
عمری ست جرعه خوار سفال سگان توست
Ҷомӣ ки об Хизр нанӯшад зи ҷоми ҷам
جامی که آب خضر ننوشد ز جام جم