Агар чаҳ пора шуд аз ғами ҳазор бораи дилам
اگر چه پاره شد از غم هزار باره دلم
Гирифт ху ба фироқи ту пораи пораи дилам
گرفت خو به فراق تو پاره پاره دلم
Чу шуд зи хӯни ҷгрбстаҳи равзани дида
چو شد ز خون جگربسته روزن دیده
зи чоки синаи рахтро кунад назораи дилам
ز چاک سینه رخت را کند نظاره دلم
Ситорае сети сиришкам ки дар шаби ҳиҷрон
ستاره ای ست سرشکم که در شب هجران
Барад ба шаҳри адами роҳ азон ситораи дилам
برد به شهر عدم راه ازان ستاره دلم
Ба даври соғари лаълати дуруст кӣ монад
به دور ساغر لعلت درست کی ماند
Агар буд чу дилати фии алмисли зи хораи дилам
اگر بود چو دلت فی المثل ز خاره دلم
Агар шумори асирони зулф хеш кунӣ
اگر شمار اسیران زلف خویش کنی
Мабод онкӣ наёяд дарин шумораи дилам
مباد آنکه نیاید درین شماره دلم
Ҳавои васли ту бози орадаш агар сад бор
هوای وصل تو باز آردش اگر صد بار
Ҷаҳди зи оташи ишқи ту чун шарораи дилам
جهد ز آتش عشق تو چون شراره دلم
Магӯ ки қатраи хӯн дар канор ҷомӣ чист
مگو که قطره خون در کنار جامی چیست
Чу дида мавҷ зад афтод дар канораи дилам
چو دیده موج زد افتاد در کناره دلم