Марои дилии сет ба сад гӯнаи дарди парварда
مرا دلی ست به صد گونه درد پرورده
Ки рафт ҷону ҷаҳонами видоъи нокарда
که رفت جان و جهانم وداع ناکرده
зи ман гузашти тағофул кунон наме донам
ز من گذشت تغافل کنان نمی دانم
Ки табъи нозукаш аз ман чаро шуд озурда
که طبع نازکش از من چرا شد آزرده
з по фиканд марои ҳиҷр ӯ мабод он рӯз
ز پا فکند مرا هجر او مباد آن روز
Ки рӯ ба мард кунад ин балои сад мурда
که رو به مرد کند این بلای صد مرده
Буд ба дидаи мардум чу мардуми дида
بود به دیده مردم چو مردم دیده
Чаҳ айб аз онкӣ шуд аз тоби хур сияҳ чарада
چه عیب از آنکه شد از تاب خور سیه چرده
Бурун фитод дил аз пардаи шикеб ва ҳануз
برون فتاد دل از پرده شکیب و هنوز
Замона то чаҳ буруни орад аз пас парда
زمانه تا چه برون آرد از پس پرده
Муқаллидон чаҳ шиносанд доғи ҳиҷрон ро
مقلدان چه شناسند داغ هجران را
Хабари зи шуъла оташ надорад афсурда
خبر ز شعله آتش ندارد افسرده
Дареғу дард ки ҷомӣ ба хшксоли фироқ
دریغ و درد که جامی به خشکسال فراق
з по фитод бар аз кишти васли нохӯрда
ز پا فتاد بر از کشت وصل ناخورده