Кардам зи дидаи пой , сӯии Машҳади ҳусайн

کردم ز دیده پای، سوی مشهد حسین

Ҳаст ин сафар ба мазҳаби ушшоқи фарзи айн

هست این سفر به مذهب عشاق فرضِ عین

Худоами марқадаш ба серум гар ниҳанд пой

خدام مرقدش به سرم گر نهند پای

Ҳқо ки бугзарад серум аз фарқи Фрқдин

حقا که بگذرد سرم از فَرق فَرقَدَین

Каъба ба гирди равза ӯ мекунад тавоф

کعبه به گرد روضه او می کند طواف

Ркби алҳҷиҷ ! ин трўҳўн ? ин ? ин ?

رَکْبَ الحَجیج! اَینَ تَروحون؟ اَین ؟ اَین ؟

Аз қоф то ба қоф параст аз кароматаш

از قاف تا به قاف پر است از کرامتش

Он ба ки ҳила ҷӯй кунад тарк шеду шин

آن به که حیله جوی کند ترک شَید و شَین

Онро ки бар изор буд ҷаъди мшкбор

آن را که بر عذار بود جعد مشکبار

Аз мӯии мустаъор чаҳ ҳоҷат ба зебу зин

از موی مستعار چه حاجت به زیب و زین

Ҷомии гадои ҳазрат ӯ бош то шавад

جامی گدای حضرت او باش تا شود

Бо роҳати висоли мубаддили азоби байн

با راحت وصال مبدل عذابِ بَین

Май рони зи дидаи сайл ки дар машраби Карим

می ران ز دیده سیل که در مشرب کریم

Бошад қазои ҳоҷати соили адои дайн

باشد قضای حاجت سایل ادای دین