Дилами зи ҳиҷри рахти рӯ ба кулба ғам кард
دلم ز هجر رخت رو به کلبه غم کرد
Пилос кулбаи ғамро либос мотам кард
پلاس کلبه غم را لباس ماتم کرد
зи тундбоди ҳаводис чаҳ ғами чунин ки маро
ز تندباد حوادث چه غم چنین که مرا
Ниҳоли ишқи ту дар синаи бех муҳкам кард
نهال عشق تو در سینه بیخ محکم کرد
Малики зҳсни ту дар обу хок сиррӣ дид
ملک زحسن تو در آب و خاک سری دید
Ки аз мушоҳидаи он суҷуд одам кард
که از مشاهده آن سجود آدم کرد
Бибин латофати ҳоҷӣ ки ёди ташнаи лабӣ
ببین لطافت حاجی که یاد تشنه لبی
Ки сӯхти даври зи каъба ба об замзам кард
که سوخت دور ز کعبه به آب زمزم کرد
Мабод роҳати марҳами насиб бе дардӣ
مباد راحت مرهم نصیب بی دردی
Ки бо ҷароҳати теғи ту ёд марҳам кард
که با جراحت تیغ تو یاد مرهم کرد
Гирифт ҷами ҳама рӯй замин ба зери нигин
گرفت جم همه روی زمین به زیر نگین
Чу васфи лаъли ту нақши нигин хотам кард
چو وصف لعل تو نقش نگین خاتم کرد
Ҷузи обёрӣ сарват надошт ҷомии чашм
جز آبیاری سروت نداشت جامی چشم
Ки аз хаёли рахти ҷӯии дидаи пар нам кард
که از خیال رخت جوی دیده پر نم کرد