Дилам ба моҳи тамом аз рахт иборат кард

دلم به ماه تمام از رخت عبارت کرد

Ҳилол гуфт ва ба абрӯии ту ишорат кард

هلال گفت و به ابروی تو اشارت کرد

Ғуломи наргиси мастонаи туам ки нигоҳ

غلام نرگس مستانه توام که نگاه

Ба тоҷи ҳишмати шоҳ аз сар ҳақорат кард

به تاج حشمت شاه از سر حقارت کرد

Расед аз ту ба длхстгони бишорати қатл

رسید از تو به دلخستگان بشارت قتل

Чаҳ айшҳо ки дил аз завқи ин бишорат кард

چه عیشها که دل از ذوق این بشارت کرد

Хаёли ғабғаби ту аз шароби кофурӣ

خیال غبغب تو از شراب کافوری

зи ҷони сӯхтаи таскини сад ҳарорат кард

ز جان سوخته تسکین صد حرارت کرد

Хароб буд куҳани кохи айши соқии давр

خراب بود کهن کاخ عیش ساقی دور

зи лои хмкдаҳи таҷдиди ин иморат кард

ز لای خمکده تجدید این عمارت کرد

Ҳазор машъала нур дид сар ба фалак

هزار مشعله نور دید سر به فلک

Касе ки куштаи меҳри туро зиёрат кард

کسی که کشته مهر تو را زیارت کرد

Расед лашкари ишқи тавъам ба малики вуҷӯд

رسید لشکر عشق توأم به ملک وجود

зи илму фазлу адаб ҳарчӣ ёфт ғорат кард

ز علم و فضل و ادب هرچه یافت غارت کرد

Хариди сифла ба илму амали биҳишт на дӯст

خرید سفله به علم و عمل بهشت نه دوست

Зиҳии хисорати табъӣ ки ин тиҷорат кард

زهی خسارت طبعی که این تجارت کرد

Нашуд нишемани ҷомии ҳарими майкадаи муфт

نشد نشیمن جامی حریم میکده مفت

Ба нақду насяи дунёу дайн аҷорт кард

به نقد و نسیه دنیا و دین اجارت کرد