Зон наранҷам ки з худ карда гранти байнам
زان نرنجم که ز خود کرده گرانت بینم
Зон биринҷам ки миёни дгронти байнам
زان برنجم که میان دگرانت بینم
Сайрят нест зи ошиқ ки садат ошиқ ҳаст
سیریت نیست ز عاشق که صدت عاشق هست
Дил барои сад дигар награнт байнам
دل برای صد دیگر نگرانت بینم
Ҳар дам аз хуй дигар медиҳадат шакли рақиб
هر دم از خوی دگر می دهدت شکل رقیب
Дар каф ӯ чу гули кӯзаи гранти байнам
در کف او چو گل کوزه گرانت بینم
Нархи арзон ту гуфтам ки ҳазорон ҷон аст
نرخ ارزان تو گفتم که هزاران جان است
Ҷой он ҳаст ки бо хеши гранти байнам
جای آن هست که با خویش گرانت بینم
Даъвӣ раҳм кунигар буд ин рост чаро
دعوی رحم کنی گر بود این راست چرا
Фориғ аз гиряи хунини ҷгронти байнам
فارغ از گریه خونین جگرانت بینم
Нест чун қади ту сарвӣ ба чамани рост вале
نیست چون قد تو سروی به چمن راست ولی
Рост бо табъи ҳамаи кажи назароти байнам
راست با طبع همه کژ نظرات بینم
Ҷомии аинсон ки дарони танги қабои дили бастӣ
جامی اینسان که درآن تنگ قبا دل بستی
Оқибати ғунчаи сифати ҷомаи дронти байнам
عاقبت غنچه صفت جامه درانت بینم