Сабо чу ҳалқаи он зулфи тобдори кушод

صبا چو حلقه آن زلف تابدار گشاد

Гиреҳи зи риштаи ҷонҳои бе қарори кушод

گره ز رشته جانهای بی قرار گشاد

зи завқи бӯсу ҳавоӣ канор туаст ба боғ

ز ذوق بوس و هوای کنار توست به باغ

Ки ғунча кард даҳони бозу гули канори кушод

که غنچه کرد دهان باز و گل کنار گشاد

Баҳор шуд сӯии бустони гузар ки ҳар гиреҳӣ

بهار شد سوی بستان گذر که هر گرهی

Ки дошт шохи гул аз ғунча дар баҳори кушод

که داشت شاخ گل از غنچه در بهار گشاد

Кушод аз даҳани танги ту дилами оре

گشاد از دهن تنگ تو دلم آری

зи ғунчаи мурғи чаманро буд ҳазор кушод

ز غنچه مرغ چمن را بود هزار گشاد

зи сарву лолаи тамошои қад ва рӯй ту кард

ز سرو و لاله تماشای قد و روی تو کرد

Чу боғбон ба чамани чашми эътибори кушод

چو باغبان به چمن چشم اعتبار گشاد

Ниҳод бар ҷигари лолаи доғ чун сӯсан

نهاد بر جگر لاله داغ چون سوسن

Забон ба васфи ту бар тарафи лолаи зори кушод

زبان به وصف تو بر طرف لاله زار گشاد

Бғир ёр надидам даруни парда касе

بغیر یار ندیدم درون پرده کسی

Қазо чу пардаи иззати з рӯй кори кушод

قضا چو پرده عزت ز روی کار گشاد

зи шаҳр ишқ махон сӯии каъбаи ҷомӣ ро

ز شهر عشق مخوان سوی کعبه جامی را

Ки пои тобаи ғурбати дарони диёри кушод

که پای تابه غربت درآن دیار گشاد