Бози гули асбоби маъшӯқӣ ба бустон соз кард
باز گل اسباب معشوقی به بستان ساز کرد
Булбул бедил навой ошиқӣ оғоз кард
بلبل بیدل نوای عاشقی آغاز کرد
Хуши баромади фоли барги базми ъушрати сохтан
خوش برآمد فال برگ بزم عشرت ساختن
Чун сабои баҳри тФؤли дафтари гул боз кард
چون صبا بهر تفؤل دفتر گل باز کرد
Дар чаман ҳар ғунча розӣ дошт дар дили сар ба меҳр
در چمن هر غنچه رازی داشت در دل سر به مهر
Лутфи боди субҳи моро воқифи он роз кард
لطف باد صبح ما را واقف آن راز کرد
Пои кӯбони гашт гулшан кун ки баҳри мақдамат
پای کوبان گشت گلشن کن که بهر مقدمت
Сабза ҳар ҷой аз ҳарири сабз пой андоз кард
سبزه هر جای از حریر سبز پای انداز کرد
Аз шукуфаи бас ки шуд шохи дарахти ороста
از شکوفه بس که شد شاخ درخت آراسته
Аҳли дилро дар ҳавояши мурғи ҷон парвоз кард
اهل دل را در هوایش مرغ جان پرواز کرد
Сабзаи барзад аз замин сргл намӯд аз шох рӯй
سبزه برزد از زمین سرگل نمود از شاخ روی
Бас ки булбули рафтагони боғро овоз кард
بس که بلبل رفتگان باغ را آواز کرد
Кард фарши шоҳидони дроъаҳро дар пои гул
کرد فرش شاهدان دراعه را در پای گل
Зоҳиди худ байн ки айби ринди шоҳид боз кард
زاهد خود بین که عیب رند شاهد باز کرد
Рӯҳи ҳофизро сабои зи анфоси ҷомии тӯҳфаи барад
روح حافظ را صبا ز انفاس جامی تحفه برد
Аз хуросон чун гузар бар хитта Широз кард
از خراسان چون گذر بر خطه شیراز کرد
Он схндони лутфи лафзу диққати маънӣ чу дид
آن سخندان لطف لفظ و دقت معنی چو دید
Офарин бар ҷавдати табъи сухан пардоз кард
آفرین بر جودت طبع سخن پرداز کرد