Ҳар хазон оядам аз ранги рузони буии фироқ

هر خزان آیدم از رنگ رزان بوی فراق

Зард шуд рӯем азин ғам ки сияҳ рӯй фироқ

زرد شد رویم ازین غم که سیه روی فراق

Нест чун васли ту холии зи мулоқоти рақиб

نیست چون وصل تو خالی ز ملاقات رقیب

Май кашами рахти иқомат ба сари кӯии фироқ

می کشم رخت اقامت به سر کوی فراق

Баҳр санҷидани сабри дили маҳрӯми зи васл

بهر سنجیدن صبر دل محروم ز وصل

Кӯҳандӯд буд санги тарозуии фироқ

کوه اندود بود سنگ ترازوی فراق

Доғҳо бар дили ман рӯзи висоли отшҳост

داغها بر دل من روز وصال آتشهاست

Ки баҷои мондаи пас аз кӯчи зи урдӯии фироқ

که بجا مانده پس از کوچ ز اردوی فراق

Бо ту чун дар ҳарами васли ним ҳамзону

با تو چون در حرم وصل نیم همزانو

Аз ту маҳрӯм нишастам пас зонуии фироқ

از تو محروم نشستم پس زانوی فراق

Ҳаст майли дилами ани сӯй ки майл дил туаст

هست میل دلم ان سوی که میل دل توست

Гарчи бошад ба мисли майли дилати сӯии фироқ

گرچه باشد به مثل میل دلت سوی فراق

Ҷомии он ба ки наҳй тан ба заъифӣ чу намонад

جامی آن به که نهی تن به ضعیفی چو نماند

Панҷаи сабри тўрои тоқати бозуии фироқ

پنجه صبر تورا طاقت بازوی فراق